Kangana Ranaut as MP: पंचायत और विधायकों के पास ज्यादा बजट, सांसदों के स्ट्रगल पर कंगना रनौत
Kangana Ranaut as MP: बॉलीवुड एक्ट्रेस कंगना रनौत अक्सर किसी न किसी वजह से चर्चा में बनी ही रहती हैं। कभी उनकी इंस्टाग्राम स्टोरी लोगों का ध्यान अपनी तरफ खींच लेती हैं, तो कभी उनके दिए हुए इंटरव्यू वायरल हो जाते हैं। इस बात से तो हर कोई वाकिफ है कि वह किसी भी बात को बिना डरे सबके सामने रखते हुए नजर आती हैं और उनका बेबाक अंदाज बहुत से लोगों को काफी पसंद भी आता है। हाल ही में उन्होंने यह बयान दिया था कि उन्हें सांसद के रूप में अपने पहले कार्यकाल में मजा नहीं आ रहा। साथ ही एक्ट्रेस ने राजनीति को एक बहुत महंगा शौक भी बताया था और अब उन्होंने सांसद के स्ट्रगल को लेकर बात की है।
पंचायतों और विधायकों के पास ज्यादा बजट
कंगना रनौत (Kangana Ranaut) ने हाल ही में हिमाचल प्रदेश के बाढ़ प्रभावित संसदीय क्षेत्र मंडी का दौरा किया था, जहां उन्होंने यह टिप्पणी की थी कि आपदा राहत प्रदान करने के लिए उनके पास कोई आधिकारिक मंत्रिमंडल नहीं है। इसके बाद उनकी काफी आलोचना भी हुई। अब एक्ट्रेस ने यह दावा किया कि पंचायतों और विधानसभा सदस्यों (विधायकों) का बजट भी सांसदों से ज्यादा होता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कोई भी सांसदों का सम्मान नहीं करता।
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एक्ट्रेस (Kangana Ranaut) ने टाइम्स नाउ के साथ बात करते हुए कहा, “बहुत से सांसद बहुत निराश हो जाते हैं और हम एक-दूसरे से (ऐसे मामलों पर) बात करते हैं। ऐसा नहीं है कि दूसरों के पास कुछ विशेषाधिकार हैं। आपको बहुत संघर्ष करना पड़ता है। आप (सांसद) राज्य और केंद्र के बीच की कड़ी हैं। इसलिए, आप मूल रूप से कहीं नहीं हैं। हम गोधूलि बेला की तरह हैं।” इसके अलावा एक्ट्रेस ने इस बात पर जोर देते हुए कि सांसद अक्सर बीच में ही अटक जाते हैं।
नहीं करते सांसद का सम्मान
एक्ट्रेस (Kangana Ranaut) ने आरोप लगाया, “जब आप अपने राज्य में जाते हैं, तो आपके पास एक भी ऐसी जगह नहीं होती जहां आप कोई परियोजना चला रहे हों। जब आप केंद्र में जाते हैं, तो आपको हमेशा मंत्रियों के कार्यालयों के बाहर कतारों में इंतजार करना पड़ता है। कई सांसद यह भी शिकायत करते हैं कि एक पंचायत या विधायक के पास भी एक सांसद से कहीं ज्यादा बजट होता है। वे हमारा सम्मान नहीं करते।”
जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समितियों (दिशा) की स्थापना को एक स्वागत योग्य कदम बताते हुए कंगना ने कहा, “(एक सांसद का) काम काफी संवाद की मांग करता है। दिशा एक बहुत बड़ा कदम है। अगर हमारे पास डिप्टी कमिश्नर या राज्य सरकार के अधीन काम करने वालों से पूछने का विशेषाधिकार या शक्ति नहीं होती, तो यह (सांसद का) पद बेमानी होता। मुझे लगता है कि यह (दिशा) इसी हताशा के कारण बनाई गई थी, ‘हमारा स्थान और काम क्या है? हमें क्या करना चाहिए और कहां?’ इसके अलावा विधायक बहुत क्षेत्रीय होते हैं और मंत्री बहुत सारे कामों में व्यस्त रहते हैं। इस बीच आप (सांसद) बीच में फंसे हुए हैं लड़खड़ा रहे हैं।”
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